मानव आधिकार प्रोटेक्शन आपका हार्दिक अभिनन्दन करता है

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मानव अधिकार प्रोटेक्शन के चर्चा में आते ही समाज विरोधी तत्वों, मनमाने नौकरशाही दलालों, अत्याचारी पुलिस व दबंगों में तहलका मच गया है | वो अपनी मनमानी में अंकुश लगना देख संगठन का विरोध करने लगे हैं | आम पीड़ित व्यक्ति इसके माध्यम से न्याय , उपचार एवं सुरक्षा प्राप्त कर रहे हैं तथा प्रतिदिन सदस्यों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है |

हमारी सक्रियता

देश एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर में मानवाधिकारों के लिए समर्पित एवं सजं बुद्धजीवियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अशासकीय सामाजिक संगठन “मानव अधिकार प्रोटेक्शन ” का गठन अभी हाल ही में 10 फरवरी 2014 को किया गया है जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा पंजीयन संख्या 885/2014/ प्रदान की गयी
 
मानव प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ प्राणी हैं तथा यह एक समाज में जीवन यापन करता हैं | समस्त प्राणियों में इसके श्रेष्ठ होने का प्रमुख माध्यम इसका सामाजिक संगठन तथा उत्तरोतर विकास की संरक्षण प्रक्रिया जिसे विज्ञानं कहते हैं , के द्वारा प्राप्त हुआ है | समाज में प्रत्येक मानव को नैतिक रूप से उसके समाज द्वारा निर्धारित कर्तव्यों तथा परम्पराओं को अंगीकृत तथा अनुपालन करने की जहाँ बाध्यता होती है , वहीँ उसके अधिकारों के संरक्षण तथा मर्यादा व आचरण की कठिनाईयों के निराकरण का दायित्व उसके समाज को होता है |

https://www.kanoonitips.com/2019/09/blog-post.html?fbclid=IwAR0q_RIK40TI4W6WOFA5uKbPK1KOmwZd1PdIrG7zIhQa4d0om6fGSiEo1Ws

मानव अधिकार प्रोटेक्शन

प्रभारी झारखंड, बिहार एवं प्रदेश अध्यक्ष पश्चिम बंगाल से संगठन की सदस्यता हेतु संपर्क करें,

आचार्य संतोष कुमार पांडे

मोबाइल नo +91 6295546924

राष्ट्रीय अध्यक्ष 
मानव अधिकार प्रोटेक्शन 
 
प्रिय बंधुवर, मानव अधिकारों का क्षेत्र जितना व्यापक है उतना ही पुराना इतिहास भी है जो मानव की उत्पत्ति से ही प्रारंभ हुआ है | विश्व में समाज की संरचना के साथ ही समाज समुदाय, समूह तथा राज्य के संचालन के नियम होते थे तथा उनका मुखिया अपने अधीनस्थ प्राणियों के संरक्षण का उत्तरदायी होता रहा है | वह स्वयं को भी इन नियमों के अंतर्गत मानता था | हर व्यक्ति हर जाती हर वर्ग के लोगों के सम्मान जनक जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए | भूख, गरीबी, अशिक्षा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को निराकरण तथा दमन एवं शोषण से मुक्ति ही मानव अधिकारों का सबसे बड़ा संरक्षण है | प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्वा मानव कल्याण से ओत प्रोत रही है | प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्वा मानव कल्याण से ओत प्रोत रही है | विश्व मानव शताब्दी विचार धाराओं, वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वेभवन्तु सुखिनः जैसी विश्व कल्याणकारी विचार धाराओं का उदय सबसे पहले भारत में ही हुआ था फ़ो अंतर्राष्ट्रीय शांति का केंद्र बना | इन्ही मूल्यों के संरक्षण एवं सर्वमान हेतु २४ अक्टूबर १९४५ को संयुक्त राष्ट्र संघ अस्तित्व में आया | संयुक्त राष्ट संघ द्वारा १० दिसम्बर १९४८ को सार्वभौमिक घोषणा पत्र तैयार हुआ तभी से १० दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पहली मिसाल है इसी के बाद मानवाधिकार अंतर्राष्ट्रीय कानून बन गया | सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकार को निम्नवत करने के लिए तथा इसके विकास के लिए संयुक्त राष्ट संघ द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया गया |२४ अक्टूबर १९४५ को संयुक्त राष्ट्र संघ अस्तित्व में आया | संयुक्त राष्ट संघ द्वारा १० दिसम्बर १९४८ को सार्वभौमिक घोषणा पत्र तैयार हुआ तभी से १० दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पहली मिसाल है इसी के बाद मानवाधिकार अंतर्राष्ट्रीय कानों बन गया | सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकार को निम्नवत करने के लिए तथा इसके विकास के लिए संयुक्त राष्ट संघ द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया गया इस घोषणा पत्र में ३० अनुच्छेद हैं | इन अनुच्छेद में सम्पूर्ण मानवाधिकार का वर्णन किया गया है | इन्हें मानवता का मैग्नाकारी कहा जाता है | संयुक्त राष्ट्र महा संघ ने मानवाधिकारों को चार रूपों(सामाजिक , आर्थिक, राजनितिक, सांस्कृतिक ) में प्रस्तुत किया है | संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार सम्बन्धी विधेयक में समानता , शिक्षा , धर्म, सामाजिक सुरक्षा ,मानव व्यवहार ,न्याय , आत्म निर्णय का अधिकार, धर्मान्तरण और आर्थिक एवं सांस्कृतिक उन्नति के अधिकार सम्मिलित हैं | बाद में इसमें बच्चों और महिलाओं के अधिकारों को सम्मिलित किया गया है,
 
 
 
 

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