Manav Adhikaar protection
मानव प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ प्राणी हैं तथा यह एक समाज में जीवन यापन करता हैं | समस्त प्राणियों में इसके श्रेष्ठ होने का प्रमुख माध्यम इसका सामाजिक संगठन तथा उत्तरोतर विकास की संरक्षण प्रक्रिया जिसे विज्ञानं कहते हैं , के द्वारा प्राप्त हुआ है | समाज में प्रत्येक मानव को नैतिक रूप से उसके समाज द्वारा निर्धारित कर्तव्यों तथा परम्पराओं को अंगीकृत तथा अनुपालन करने की जहाँ बाध्यता होती है , वहीँ उसके अधिकारों के संरक्षण तथा मर्यादा व आचरण की कठिनाईयों के निराकरण का दायित्व उसके समाज को होता है | स्पष्ट है कि यदि समाज के सभी लोग अपने सामाजिक दायित्वों तथा कर्तव्यों  का  निष्ठापूर्वक पालन करें तो अधिकार तथा मर्यादा की रक्षा के लिए किसी प्रयास की आवश्यकता ही नहीं होगी किन्तु सामाजिक स्तर पर अपने कर्तव्य व आचरण की पवित्रता के अभाव में मानव अधिकारों पर  लोग प्रहार करते हैं जिसके फलस्वरूप इसके संरक्षण हेतु अनेक उपाय करने पड़ते हैं ताकि सामाजिक समरसत्ता के साथ समाज बना रह सके तथा प्रत्येक व्यक्ति उसमे सुरक्षित रहते हुए समाज में अपना योगदान कर सके|

हमारा संगठन

देश एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर में मानवाधिकारों के लिए समर्पित एवं सजं बुद्धजीवियों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अशासकीय सामाजिक संगठन "मानव अधिकार प्रोटेक्शन " का गठन अभी हाल ही में 10 फरवरी 2014 को किया गया है जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा पंजीयन संख्या 885/2014/ प्रदान की गयी

प्राचीन भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति के ग्रंथों में प्राणी मात्र के हित का उद्देश्य वैदिक साहित्य में सर्वत्र दृष्टिगत होते हैं | वैदिक सभ्यता के सदघोष में “सर्वभुत हिते रताः” , “वसुधैव कुटुम्बकम“, “योगक्षेम वहाम्यहम ”  के साथ ही पुराण काल,उपनिषद तथा अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी समाज के प्रत्येक व्यक्ति के मानवीय अधिकारों को पूर्ण संरक्षण देने की अवधारणा प्रमुख रूप से पायी जाती है | स्पष्ट है कि मानव अधिकारों के प्रति समाज शुरू से ही जागरूक तथा संरक्षण हेतु प्रयत्नशील  रहा है तथा आज भी है |

 

मानव अधिकार प्रोटेक्शन के चर्चा में आते ही समाज विरोधी तत्वों, मनमाने नौकरशाही दलालों, अत्याचारी पुलिस व दबंगों में तहलका मच गया है | वो अपनी मनमानी में अंकुश लगना देख संगठन का विरोध करने लगे हैं | आम पीड़ित व्यक्ति इसके माध्यम से न्याय , उपचार एवं सुरक्षा प्राप्त कर रहे हैं तथा प्रतिदिन सदस्यों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है |

MANAV ADHIKAAR PROTECTION LOGO

हमारा उद्देशय

  • मानव समाज कल्याण में मानवाधिकार के प्रति जागृति लाने का प्रयास करना |
  • समाज को मानवाधिकारों की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करना एवं भारतीय समाज में वर्णित मानवाधिकारों   का ज्ञान कराना |
  • भारत सरकार द्वारा पारित मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम १९९३ का जन-जन में प्रचार प्रसार करना जिससे आम आदमी उसका लाभ प्राप्त कर सके|
  • राष्ट्रीय  मानवाधिकार आयोग , राज्य मानवाधिकार आयोगों एवं विदेशों में गठित मानवाधिकार आयोगों के संपर्क में रह कर उनकी सेवाएँ आम आदमी को मुहैया कराने का प्रयास कराना |
  • समाज के विभिन्न वर्गों के उत्पीड़न के निराकरण हेतु शासन प्रशासन राष्ट्रीय  मानवाधिकार आयोग , मानवाधिकार न्यायालाओं  एवं अन्य स्तरों  पर समुचित न्याय दिलाने सम्बंधित प्रयास करना |
  • मानवाधिकारों के हनन करने वाली ताकतों के विरुद्ध सतत संघर्ष करना |
  • मानव-मानव के बीच कटुता, हिंसा, वैमनस्यता, घृणा का वातावरण समाप्त करा कर आपसी प्रेम व शांति का सन्देश विश्व के कोने कोने में पहुचाने का प्रयत्न करना|
  • शासन प्रशासन  की मानवोपयोगी नीतियों के सफल क्रियान्वन में पूर्ण सहयोग प्रदान करना |
  • अच्छे आचरण हेतु समय समय पर कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षण देना ताकि लोग आचरण एवं अधिकारों के बीच तारतम्य स्थापित कर सकें |
  • मानाधिकार के बारे में !

हमारा मिशन

मानवाधिकार का हनन मानव द्वारा ही किया जाता है चाहे वह व्यक्ति दबंग हो या सरकारी लोक सेवक| इसमें विभाग या कुर्सी से कोई मतलब नहीं होता| उत्पीड़नकर्ता चाहे कितना ही उच्च या सशक्त पद पर हो , परिवार में उसकी हैसियत एक साधारण अभियुक्त जैसी होती तथा उसे व्यक्तिगत तौर पे न्यायलय प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है| उस समय उसे मानव उत्पीड़न का एहसास हो जाता है|

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संघटन का प्रमुख नेतृत्व

हमारा संगठन राष्ट्रीयस्तर पर हमारे कुशल एवं प्रभावशाली पदाधिकारियों के नेतृत्व से सुचारु के सहयोग से चल रहा है हमारे संगठन के पदाधिकारियों के बारे जानकारी के लिए निचे दिए गए बटन पर क्लिक करे ।

प्रिय बंधुवर, मानव अधिकारों का क्षेत्र जितना व्यापक है उतना ही पुराना इतिहास भी है जो मानव की उत्पत्ति से ही प्रारंभ हुआ है | विश्व में समाज की संरचना के साथ ही समाज समुदाय, समूह तथा राज्य के संचालन के नियम होते थे तथा उनका मुखिया अपने अधीनस्थ प्राणियों के संरक्षण का उत्तरदायी होता रहा है | वह स्वयं को भी इन नियमों के अंतर्गत मानता था | हर व्यक्ति हर जाती हर वर्ग के लोगों के सम्मान जनक जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए | भूख, गरीबी, अशिक्षा एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं को निराकरण तथा दमन एवं शोषण से मुक्ति ही मानव अधिकारों का सबसे बड़ा संरक्षण है | प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्वा मानव कल्याण से ओत प्रोत रही है | प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति विश्वा मानव कल्याण से ओत प्रोत रही है | विश्व मानव शताब्दी विचार धाराओं, वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वेभवन्तु सुखिनः जैसी विश्व कल्याणकारी विचार धाराओं का उदय सबसे पहले भारत में ही हुआ था फ़ो अंतर्राष्ट्रीय शांति का केंद्र बना | इन्ही मूल्यों के संरक्षण एवं सर्वमान हेतु २४ अक्टूबर १९४५ को संयुक्त राष्ट्र संघ अस्तित्व में आया | संयुक्त राष्ट संघ द्वारा १० दिसम्बर १९४८ को सार्वभौमिक घोषणा पत्र तैयार हुआ तभी से १० दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पहली मिसाल है इसी के बाद मानवाधिकार अंतर्राष्ट्रीय कानों बन गया | सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकार को निम्नवत करने के लिए तथा इसके विकास के लिए संयुक्त राष्ट संघ द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया गया |२४ अक्टूबर १९४५ को संयुक्त राष्ट्र संघ अस्तित्व में आया | संयुक्त राष्ट संघ द्वारा १० दिसम्बर १९४८ को सार्वभौमिक घोषणा पत्र तैयार हुआ तभी से १० दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है यह अंतर्राष्ट्रीय मानकों की पहली मिसाल है इसी के बाद मानवाधिकार अंतर्राष्ट्रीय  कानून बन गया | सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकार को निम्नवत करने के लिए तथा इसके विकास के लिए संयुक्त राष्ट संघ द्वारा महत्वपूर्ण कार्य किया गया इस घोषणा पत्र में ३० अनुच्छेद हैं | इन अनुच्छेद में सम्पूर्ण मानवाधिकार का वर्णन किया गया है | इन्हें मानवता का मैग्नाकारी कहा जाता है | संयुक्त राष्ट्र महा संघ ने मानवाधिकारों को चार रूपों(सामाजिक , आर्थिक, राजनितिक, सांस्कृतिक ) में प्रस्तुत किया है | संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार सम्बन्धी विधेयक में समानता , शिक्षा , धर्म, सामाजिक सुरक्षा ,मानव व्यवहार ,न्याय , आत्म निर्णय का अधिकार, धर्मान्तरण और आर्थिक एवं सांस्कृतिक उन्नति के अधिकार सम्मिलित हैं | बाद में इसमें बच्चों और महिलाओं के अधिकारों को सम्मिलित किया गया है,

सदस्य बनें!

आप हमारे संगठन के सदस्य बनकर मानव अधिकारों की रक्षा और समाज में न्याय स्थापित करने की इस महत्वपूर्ण मुहिम का सक्रिय हिस्सा बन सकते हैं। आपका एक छोटा-सा कदम भी उन लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है जो अन्याय, शोषण और उत्पीड़न के कारण अपनी आवाज़ नहीं उठा पा रहे हैं। मानव अधिकार प्रोटेक्शन संगठन से जुड़कर आपको समाज हित और जनहित में कार्य करने का अवसर मिलेगा, जहाँ आपकी सोच, समय और योगदान मानवता के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। यदि आप शिक्षित हैं, स्वच्छ छवि रखते हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की इच्छा रखते हैं, तो आज ही सदस्यता हेतु आवेदन करें और मानव अधिकारों के लिए एक सशक्त आवाज़ बनें।