मानव अधिकार प्रोटेक्शन भारत के चेयरमैन श्री घनश्याम गुप्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के हजारों प्राथमिक विद्यालयों के एकतरफा विलय की योजना पर गहरी नाराज़गी और चिंता व्यक्त की है।
श्री गुप्ता ने कहा
शिक्षा का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित मौलिक अधिकार है। कम नामांकन के बहाने विद्यालय बंद कर बच्चों को दूर के स्कूलों में भेजने का निर्णय बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा की पहुँच और उनके मूल अधिकारों पर सीधा हमला है। सरकार का यह कदम शिक्षा के निजीकरण और ग्रामीण बच्चों को शिक्षा से दूर करने की साजिश की तरह लगता है।”
मानव अधिकार प्रोटेक्शन भारत का मानना है कि –
✅ विद्यालय बंद करने या विलय करने से बच्चों विशेषकर बालिकाओं की पढ़ाई बाधित होगी।
✅ लंबी दूरी तय करने के कारण ड्रॉपआउट रेट बढ़ेगा।
✅ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर और खराब होगा।
श्री घनश्याम गुप्ता ने मांग की है कि –
1️⃣ राज्य सरकार इस नीति को तुरंत वापस ले।
2️⃣ जिन स्कूलों में नामांकन कम है, वहां नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।
3️⃣ शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act) और संविधान के अनुच्छेद 21-A का सम्मान किया जाए।
मानव अधिकार प्रोटेक्शन भारत साफ कर देना चाहता है कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया, तो संगठन कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों तरीकों से आवाज़ उठाने को बाध्य होगा। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
घनश्याम गुप्ता
चेयरमैन
मानव अधिकार प्रोटेक्शन भारत
