मजदूरों के शोषण के खिलाफ उठी बुलंद आवाज – अब नहीं सहेंगे अन्याय
जनपद फिरोजाबाद के विभिन्न कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के साथ हो रहे गंभीर शोषण और अन्याय का मामला सामने आया है। मेहनतकश मजदूरों के अधिकारों का खुलेआम हनन किया जा रहा है, जबकि शासन-प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है।
कारखानों में कार्यरत श्रमिकों के नाम फार्म नंबर-12 (हाजरी रजिस्टर) में दर्ज नहीं किए जाते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन सहित अन्य सुविधाएं श्रमिकों को नहीं दी जा रही हैं। वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 का वार्षिक बोनस वास्तविक श्रमिकों को नहीं दिया जा रहा, बल्कि फर्जी नामों पर डी फार्म के नाम से भुगतान दिखाया जा रहा है। दुर्घटना होने पर घायल श्रमिकों का समुचित इलाज नहीं कराया जाता, मृत्यु होने पर 4-5 लाख रुपये देकर मामला दबा दिया जाता है। परिवार को कोई सुविधा नहीं मिलती। हक की आवाज उठाने वाले श्रमिकों को नौकरी से निकालकर झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। चूड़ी उद्योग में 8 घंटे के स्थान पर साढ़े 9 घंटे जबरन कार्य कराया जा रहा है।
मजदूर नेता भूरी सिंह यादव ने कहा किआज मजदूर अपने ही हक के लिए तरस रहा है। कारखानों में खुलेआम शोषण हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो मजदूर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
हमारी मांगें हैं, सभी श्रमिकों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए। न्यूनतम वेतन के वेतन के भुगतान सहित सभी सरकारी सुविधाएं तुरंत लागू हों। बकाया बोनस का पारदर्शी भुगतान कराया जाए। दुर्घटना पीड़ितों और मृतकों के परिवार को उचित मुआवजा मिले। फर्जी मुकदमों की जांच कर उन्हें समाप्त किया जाए। 8 घंटे कार्य नियम का सख्ती से पालन कराया जाए।
घनश्याम गुप्ता (राष्ट्रीय अध्यक्ष, मानव अधिकार प्रोटेक्शन भारत) ने कहा कि मजदूरों के साथ हो रहा यह अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मानव अधिकार प्रोटेक्शन हर मजदूर के साथ खड़ा है। यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश भर में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो मजदूर अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन करेंगे।
